
धर्मेन्द्र झा/रासस
बाकु : संयुक्त राष्ट्रसङ्घीय संरचना महासन्धि पक्ष राष्ट्रसभके राष्ट्रप्रमुख आ सरकार प्रमुख सहभागी शिखर सम्मेलनमे जलवायु परिवर्तनप्रति चिन्ता व्यक्त करैत कार्बन उत्सर्जनके कम करबामे जोड़ देलैन अइछ ।
बाकुमा जारी शिखर सम्मेलन, कोप–२९ मे सहभागी वक्तासभ जलवायु परिवर्तनक कारण बढैत गेल तापमान आ हरित ग्यास उत्सर्जन रोकबाक लेल विश्व समुदायक साझा ऐक्यबद्धतासहितके प्रयास आवश्यकता रहल देखेलैन । ओ सभ जलवायु परिवर्तनके असरसँ कोनो न कोनो रूपमे विश्वक प्रत्येक व्यक्ति प्रभावित भेल कहैत तेहन असरकेँ कम करबाक लेल सब राष्ट्रके धीयान आकर्षित करबाक बतौलैन अइछ ।
सम्मेलनकेँ सम्बोधन करैत राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल हिमालयके सुरक्षा मतलबे पृथ्वीक सुरक्षा छी, ओइ बातके ख्याल करबाक लेल विश्व समुदायकेँ आह्वान केलैन । ओ कहलैन, “हिमालयके सुरक्षा मतलबे पृथ्वीक सुरक्षा छी ओइ बातकेँ सब कोइ ख्याल करी, पर्वतीय देशक उच्च हिमाल कारी पहाड़मे बदलबाक क्रम शुरू भेल अइछ, जइसँ अपन देशमे मात्र नै निचलका तटीय देशसभ सेहो सङ्कटमे अइछ ई बात विश्व समूदायके नै बिसरबाक चाही ।”
“नगण्य कार्बनक उत्सर्जन करैत अइछ मुदा ओकरापर व्यापक नकारात्मक प्रभावक सामना करए पड़ल अइछ, नेपाल एहने विरोधाभासी स्थितिसँ गुजैर रहल अइछ,“ राष्ट्रपति पौडेल कहलैन । राष्ट्रपति पौडेल कहलैन जे बाइढ़, भूस्खलन आ हिमनदी विस्फोट सहित हालक आपदाके कारण सैकड़ो लोकक जान आ अरबों रुपयाँक शारीरिक क्षति भेल अइछ ।
“विश्व समुदायके लाभ आ पृथ्वीक रक्षाक लेल नेपाल प्राकृतिक संसाधनक उपयोगमे अनुशासन कायम राखैत आ वन क्षेत्रमे वृद्धि करैत कार्बन उत्सर्जन कम करबाक महत्वाकांक्षी एनडीसी योजना लागू क रहल अइछ । स्वच्छ ऊर्जाक उत्पादन आ आपूर्तिपर जोड़ देल गेल अइछ आ अन्य कतेको प्रयास कएल गेल अइछ,“ राष्ट्रपति पौडेल कहलैन । सम्मेलनक क्रममे नेपाल कातिक २८ गते हुनक नेतृत्वमे एकटा अलगे उच्च स्तरीय सत्र आयोजित हेत, जाहिसँ विश्वक ध्यान अपन एजेण्डा दिस आकृष्ट कएल जा सकए ।
सोमबार के दिनसँ शुरू भेल अजरबैजानक बाकूमे जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्रसङ्घीय संरचना महासन्धि (युएनएफसीसीसी)क पक्ष राष्ट्रसभके २९ औं सम्मेलन (कोप–२९) सम्मेलनमे संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस नवीनतम चुनौतिसभक सामना करबाक लेल जलवायु वित्त पर एकटा नव समझौताक आवश्यकतापर जोड़ देलैन । “नव राजकोषीय लक्ष्य निर्धारित कएल जेबाक चाही आ विकासशील देशसभकेँ बाकूसँ खाली हाथ नइँ घुरबाक चाही”, ओ कहलैन । आगू कहलैन जे विश्वक तापक्रममे १.५ डिग्री सेल्सियसक वृद्धिकेँ सीमित करबाक लेल पर्याप्त तैयारीके आवश्यकता अइछ ।
उद्घाटन समारोहमे अजरबैजानक राष्ट्रपति इल्हाम दुनियाभरिक लगभग २०० देशके प्रतिनिधिसभक स्वागत केलैन आ जलवायु परिवर्तनसँ उत्पन्न समस्यासभक समाधानक लेल सभसँ एकता कायम करबा ल आग्रह केलैन । ओ जलवायु परिवर्तनसँ उत्पन्न समस्याक समाधानक लेल एकजुट भ आगू बढ़बाक आवश्यकतापर जोड़ देलनि ।
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तनके कार्यकारी सचिव साइमन स्टियल कहलैन जे जलवायु संकट अर्थव्यवस्थाकेँ तेजीसँ नष्ट क रहल अइछ । दुनिया भरिमे बढ़ैत जलवायु संकट दुनियाक प्रत्येक व्यक्तिकेँ कोनो न कोनो रूपसँ प्रभावित क रहल अइछ । ओ जलवायुसँ जुड़ल समस्याक समाधानक लेल सभकेँ मिलिक काज करबाक आवश्यकतापर जोड़ देलैन ।
“जलवायु लक्ष्यपर सहमति मात्र पर्याप्त नै हएत । हमरा विश्वक वित्तीय प्रणालीके पुन परिमार्जन करबाक प्रयास जरूरत अइछ । जरूरी देशसभकेँ आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करए पड़त“, ओ कहलनि, “एतय बाकूमे, अन्तर्राष्ट्रीय कार्बन बजारकेँ संचालनमे अनबाक लेल हमरासभकेँ पेरिस समझौताक अनुच्छेद ६ केँ अन्तिम रूप देबाक चाही । हमरासभ अपन पूर्व निर्धारित लक्ष्यके अनुसार आगू बढ़बाके चाही ।”
विश्वके नेता बाकुमे
सम्मेलनक स्थल बाकूमे आयोजित अइ सम्मेलनमे दुनिया भरिक लगभग २०० राष्ट्राध्यक्ष आ अन्य उच्च गणमान्य व्यक्ति सहभागी भेल छइथ । ई प्रतिनिधिसभ ठाँम हरियर कपड़ामे देखल जा सकैत अइछ, जखन कि कार, टैक्सीमे कोप–२९ लोगो आ प्रचार सामग्री ल क देखल जा सकैत अइछ । बाकूमे होटल भरल अइछ । सहभागीसभक उपलब्धता आ आर्थिक स्थितिक अनुसार स्टार होटल, सामान्य होटल, अपार्टमेंट आ छात्रावासमे ठहरल छैथ । सम्मेलनमे ४० देशक राष्ट्रपति वा उपराष्ट्रपति आ ३५ देशक प्रधानमन्त्री भाग ल रहल छइथ ।
नेपाल अइसँ पहिने सन् २००९ डेनमार्कके कोपहेगनमे भेल कोप–१५ मे तत्कालीन प्रधानमन्त्री माधवकुमार नेपाल, सन् २०१८ मे पोल्याण्डमे भेल कोप–२४ मे तत्कालीन राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी, सन् २०२१ मे संयुक्त अधिराज्यक स्कटल्याण्डमे सम्पन्न कोप–२७ मे तत्कालीन प्रधानमन्त्री शेरबहादुर देउवा आ सन् २०२३ मे संयुक्त अरब इमिरेट्सके दुबईमे सम्पन्न कोप–२८ मे तत्कालीन प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ क नेतृत्वमे उच्चस्तरीय सहभागि भेल छल ।
नेपालक दिससँ हरेक कोपसभमे जलवायुजन्य सङ्कटके कारण पर्वतीय क्षेत्र असुरक्षित रहल, हिमालके हिम पघैलके कारीपत्थरमे बदैल रहल, हिमताल विष्फोट होबाक खतरा रहल जोखिम भेल, पर्वतीय मुद्दाकेँ उच्च प्राथमिकताक सङ उठाएल गेल अइछ ।
अइबेरक नेपालक ‘एजेन्डा’
अगिला अगहन ७ गतेधैर चलएबला कोप–२९ मे जलवायुजन्य जोखिम न्यूनीकरण करबाक लेल आ देशक समग्र हित लेल खास क छ टा मुद्दाकेँ उच्च प्राथमिकता द नेपाली प्रतिनिधिसभ कोपमे उपस्थित भेल छइथ । वन तथा वातावरण मन्त्रालयक अनुसार जलवायु वित्त, जलवायुजन्य हानिनोक्सानी न्यूनीकरण, कार्बन व्यापार, उत्सर्जन मापन, पर्वतीय मुद्दा, प्रविधि आ क्षमता अभिवृद्धि, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन, समावेशिताक छ विषयगत कार्यपत्र तैयार कएल गेल अइछ ।
बाकुमे रहल राष्ट्रपति पौडेल ट्रेन्ड न्यूज एजेन्सीसङे बातचितके क्रममे जलवायु परिवर्तनक कारणेँ नेपालजकाँ देशसभ बेसी समस्या खेप रहलासँ विश्वकेँ अइ विषयमे विशेष धीयान देबाक चाही कहलैन ।
“जाहि तरहें बढ़ैत जलवायु परिवर्तन मानव सभ्यता, संस्कृति आ पृथ्वीकेँ चुनौती द रहल अइछ, ई हमरासभकेँ इतिहासक एकटा महत्वपूर्ण मोड़ पर अनलक अइछ ।” “स्थिति एतेक गम्भीर अइछ जे यदि हम वर्तमान जलवायु संकटसँ निपटबाक लेल उचित उपाय अपनेबाकमे असफल रहब तँ अइ शताब्दीक अन्तधैर तापक्रममे ३.१० डिग्री सेल्सियसक वृद्धि भ सकैत अइछ संयुक्त राष्ट्र चेतावनी देने छै ।”
द्विपक्षीय भेटवार्ता एवं क्षेत्रीय अभिरूचि
कोप–२९ मे भाग लेबाक लेल एतय आएल राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल आइ माल्दिभ्सके राष्ट्रपति डा. मोहम्मद मैज्जू संग भेटघाट केलैन । दक्षिण एशियाइ क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क)क सदस्य देश नेपाल आ माल्दिभ्सके अध्यक्षसभक बीच भेल बैसारमे जलवायु परिवर्तनक प्रभावक कारण दुनू देशमे आइब रहल समस्या आ चुनौती सहित समकालीन मुद्दापर चर्चा कएल गेल ।
एम्हर वनमन्त्री ऐनबहादुर शाही हिन्दकुश क्षेत्रक प्राकृतिक वातावरण, सांस्कृतिक विविधता आ आर्थिक व्यवस्थाकेँ धीयानमे राइख जलवायु अनुकूलनक लेल क्षेत्रीय, राष्ट्रीय आ स्थानीय योजनाकेँ लागू करबाक आवश्यकता पर जोड़ देलैन ।
जलवायु परिवर्तनसम्बन्धी संयुक्त राष्ट्रसङ्घीय संरचना महासन्धि पक्षधर राष्ट्रके २९ औं शिखर सम्मेलन (कोप–२९) सम्मेलनक क्रममे भूटानद्वारा आइ अइठाँम आयोजित वातावरणमन्त्रीक बैसारमे ओ एकर लेल हिन्दकुश हिमालयन क्षेत्रके वातावरणमन्त्रीक साझा मञ्च बनेबाक लेल उपयुक्त हेबाक धारणा व्यक्त केलैन ।
दु परियोजना कार्यान्वयनमे आएत
तहिना कोप–२९ मे दूटा परियोजना लागू कएल जाएत । विश्व वातावरणीय सुविधा (जीईएफ)के सहयोगमे ९.२ मिलियन अमेरिकी डलरक ई परियोजना मरिण जलाधार सिन्धुली जिलामे पाँच सालक लेल संचालन होएबाक लेल तैयार अइछ ।
मरिण जलाधार क्षेत्रमे बसोबास करएबला स्थानीयवासीके जलवायुजन्य जोखिमके असरसँ अनुकूलनके अभिवृद्धि करैत उत्थानकरबाक उद्देश्यके सङ वन तथा वातावरण मन्त्रालय यी आयोजना सचालन करत ।
तहिना जीईएफक सहयोगसँ १.६५ मिलियन अमेरिकी डलरसँ पारदर्शीताक लेल क्षमता अभिवृद्धि (सीबीआईटी) कार्यक्रम चलयबाक लेल समझौता भेल अइछ । नेपालकेँ पेरिस समझौताक अन्तर्गत अनुच्छेद १३ परियोजनाक प्रतिवेदन तैयार करए पड़त । ई कार्यक्रम दू साल धैर चलत ।
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